Pear Farming Jharkhand : पहाड़ों पर लटकी सुनहरी नाशपाती, बदल रही आदिवासी परिवारों की कहानी

    28-May-2026
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Pear Farming Jharkhand :
झारखंड के लातेहार जिले में स्थित नेतरहाट का पठारी क्षेत्र अपनी धुंध भरी वादियों, मनमोहक सूर्योदय व सूर्यास्त, घने जंगलों, शांत वातावरण और सुहावने मौसम के लिए देशभर में मशहूर है। लेकिन यह हिल स्टेशन अब केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए नहीं बल्कि अपने नाशपाती के बागानों की वजह से नयी पहचान बना रहा है। ये बागान हरियाली के अपने सुंदर नजारों के साथ ही आदिम जनजातीय समुदायों की आजीविका और बदलती अर्थव्यवस्था की जीवंत कहानी भी सुनाते हैं।

करीब एक हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर बसे नेतरहाट की ठंडी जलवायु, अच्छी वर्षा और जल निकासी वाली मिट्टी नाशपाती की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यहां की नाशपाती अपने आकार और मिठास से स्थानीय बाजारों में अलग पहचान बनाती है। यहां कृषि विभाग का डंकन बागान करीब 85 एकड़ में फैला हुआ है, जबकि कई स्थानीय परिवार भी छोटे स्तर पर नाशपाती की बागवानी कर रहे हैं।

नेतरहाट में नाशपाती की खेती आदिवासी समुदायों की पारंपरिक कृषि का हिस्सा नहीं रही है। औपनिवेशिक काल में यहां की अनुकूल जलवायु देखकर इन बागानों की नींव पड़ी और बाद के प्रशासनिक प्रयासों ने इन्हें विस्तार दिया।

बताया जाता है कि औपनिवेशिक दौर में यहां की जलवायु को देखते हुए इन बागानों की शुरुआत हुई थी, जिसे बाद में सरकारी प्रयासों और स्थानीय भागीदारी ने आगे बढ़ाया। स्थानीय आदिवासी समुदाय में मालिक नहीं, बल्कि मजदूर के रूप में जुड़े हैं। हालांकि, कुछ पेड़ स्थानीय लोगों के अपने भी हैं। नाशपाती की बागवानी आज यहां स्थानीय जनजीवन और अर्थव्यवस्था के साथ एक नया रिश्ता कायम कर चुकी है।

आज नाशपाती के बागान स्थानीय लोगों के रोजगार का बड़ा जरिया बन चुके हैं। ये बागान कुछेक रैयती लोगों की आय का साधन तो हैं ही, साथ ही फल तोड़ने, छंटाई, पैकिंग और ढुलाई जैसे कामों में स्थानीय पुरुषों और महिलाओं को मौसमी रोजगार भी देते हैं। यह भागीदारी केवल श्रम तक नहीं रुकती, बल्कि बागवानी के कौशल और अनुभव के रूप में एक अनौपचारिक प्रशिक्षण भी यहां चलता रहता है।

नेतरहाट के कई गांवों में, पुरुष अक्सर काम की तलाश में बाहर चले जाते थे, जिससे महिलाओं पर परिवार की पूरी जिम्मेदारी आ जाती थी। ऐसे में नाशपाती के बागानों ने महिलाओं को अपने घरों के पास ही रोजगार और आत्मनिर्भर बनने का मौका दिया है। महिलाएं इन बागानों की असली ताकत हैं। फल पकने के मौसम में बागानों में महिलाओं की उपस्थिति सबसे अधिक दिखती है।

नाशपाती तोड़ने से छंटाई और ग्रेडिंग तक हर काम में वे सक्रिय रहती हैं। महिलाएं अनौपचारिक समूह बनाकर मिलकर काम करती हैं, जिससे उत्पादकता बढ़ती है और आपसी सहयोग मजबूत होता है।