Summer Irrigation Tips : जड़ों को लग रहा ‘हीट शॉक’, इसलिए खराब हो रही कद्दू वर्गीय फसलें

    28-May-2026
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Summer Irrigation Tips :
भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए लगातार सिंचाई कर रहे हैं, लेकिन कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि गलत समय पर पानी देना पूरी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर कद्दू वर्गीय फसलें जैसे लौकी, कद्दू, करेला, खीरा, तरबूज और खरबूजा तेज गर्मी में ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहर के समय पानी देने से पौधों की जड़ों पर अचानक दबाव बढ़ जाता है, जिससे पौधों में बीमारियां और कीट तेजी से फैलने लगते हैं।

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार सुबह की नमी और दोपहर की तेज उमस फसलों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। इस स्थिति में पाउडरी मिल्ड्यू जैसी बीमारी तेजी से फैलती है। इस बीमारी में पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसा जमाव दिखाई देने लगता है, जिससे पौधों की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है। अगर समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो कुछ ही दिनों में पूरी फसल सूख सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान अक्सर ज्यादा गर्मी देखकर दिन में पानी दे देते हैं, लेकिन यही बहुत बड़ी गलती साबित होती है। तेज गर्म मिट्टी पर पानी डालने से जड़ों पर अचानक तापमान का दबाव पड़ता है, जिसे फिजियोलॉजिकल स्ट्रेस कहा जाता है।

जब गर्म मिट्टी पर पानी डाला जाता है, तो तापमान में अचानक बदलाव आता है। इससे जड़ों को झटका लगता है और पौधे पोषक तत्व सही तरीके से अवशोषित नहीं कर पाते। इसका असर फलों पर भी दिखता है। फलों का आकर छोटा हो जाता है और वे पीले होकर गिरने लगते हैं और कई बार फलों का आकार टेढ़ामेढ़ा हो जाता है। किसान इसे अक्सर खाद की कमी समझ लेते हैं, जबकि असली कारण गलत समय पर सिंचाई होता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा नमी और उमस सफेद मक्खी और एफिड्स जैसे रस चूसने वाले कीटों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। ये कीट पौधों का रस चूसने के साथ कई वायरल बीमारियां भी फैलाते हैं। लगातार नमी रहने से कीटनाशकों का असर भी कम हो जाता है, जिससे फसल को और ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गर्मी के मौसम में सिंचाई के साथ खेत में नमी संतुलित रखना बेहद जरूरी माना जाता है।

सिंचाईं का सही तरीका
कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार कद्दू वर्गीय फसलों में सिंचाई का सबसे अच्छा समय शाम या सूर्यास्त के बाद का माना जाता है। इससे मिट्टी रातभर ठंडी रहती है और पौधों को धीरे धीरे नमी मिलती रहती है। अगर किसान ड्रिप सिंचाई का उपयोग कर रहे हैं, तो सुबह सूर्योदय से पहले और शाम को हल्की सिंचाई करनी चाहिए।

नालियों से सिंचाई करने वाले किसानों को रोजमर्रा की जिंदगी में 2 से 3 दिन के अंतराल पर शाम के समय पानी देना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर सिंचाई करने से फसल की गुणवत्ता, उत्पादन और किसानों की कमाई तीनों में सुधार होता है।