Dragon Fruit Plant Care In Summer : 40°C की गर्मी में भी नहीं सूखेगा ड्रैगन फ्रूट, अपनाएं ये 3 स्मार्ट तरीके

    30-May-2026
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Dragon Fruit Plant Care In Summer 
: भारत में ड्रैगन फ्रूट की खेती बहुत तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इसका कारण यह है कि ड्रैगन फ्रूट का बाजार मूल्य बहुत अच्छा है और लोगों की मांग भी बढ़ रही है। इसलिए, किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं और अपने खेतों में ड्रैगन फ्रूट की खेती करना पसंद कर रहे हैं।

वैसे तो ड्रैगन फ्रूट कैक्टस फैमिली का पौधा है, जो कम पानी और सामान्य गर्मी को बहुत आसानी से झेल लेता है, लेकिन जब गर्मियों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने लगता है. तो इसकी कोमल टहनियां झुलसने लगती हैं।

तेज कड़कती धूप और लू के चलते पौधों की ग्रोथ रुक जाती है और उनके पीले होकर सूखने का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में अगर आप थोड़े से एडवांस और स्मार्ट तरीके अपनाएंगे, तो अपनी इस कीमती फसल को गर्मी के टॉर्चर से पूरी तरह सुरक्षित रख सकते हैं। चलिए आपको बताते हैं वो तरीके-

ग्रीन नेट और मल्चिंग से करें सुरक्षा

प्रचंड गर्मी के दिनों में ड्रैगन फ्रूट के पौधों को सीधे सनबर्न से बचाने के लिए सबसे पहला और बेहतरीन उपाय है ग्रीन शेड नेट का इस्तेमाल करना। इसके लिए आप पौधों के ऊपर लगभग 50% डेंसिटी वाला ग्रीन नेट लगा सकते हैं, जो तेज और तीखी धूप को छानकर पौधों तक पहुंचाता है। जिससे उन्हें जरूरी रोशनी भी मिल जाती है और वे झुलसने से भी बच जाते हैं।

इसके साथ ही पौधों की जड़ों में नमी को लंबे समय तक लॉक रखने के लिए मल्चिंग तकनीक अपनाना बेहद जरूरी है। आप पौधों के चारों तरफ सूखी घास, पुआल या गन्ने की सूखी पत्तियों की एक मोटी लेयर बिछा दें, जिससे मिट्टी की नमी धूप के कारण जल्दी भाप बनकर नहीं उड़ेगी और जड़ों के पास का तापमान एकदम मेंटेन रहेगा।

सिंचाई का समय
गर्मियों के सीजन में ड्रैगन फ्रूट की सिंचाई का तरीका और समय बदलना दूसरा सबसे बड़ा और जरूरी कदम है। इस मौसम में दोपहर के वक्त पानी देने की भूल बिल्कुल न करें, बल्कि हमेशा सुबह एकदम जल्दी या फिर शाम को सूरज ढलने के बाद ही हल्की सिंचाई करें जिससे जड़ों को ठंडी मिट्टी का अहसास मिले। पानी देते समय ध्यान रखें कि ड्रिप इरिगेशन या फव्वारा विधि सबसे बेस्ट होती है ताकि पानी की बर्बादी न हो और नमी बनी रहे।

न्यूट्रिशन
गर्मी के मौसम में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग पौधों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। इसके बजाय केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) या सीवीड लिक्विड एक्सट्रैक्ट जैसे ठंडे ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट्स का इस्तेमाल करें ताकि पौधे अंदर से स्ट्रॉन्ग रहें।

इन बातों का भी रखें ध्यान

* खेत में जल निकासी की अच्छी व्यवस्था रखें।
* पौधों की नियमित निगरानी करें।
* सूखी या क्षतिग्रस्त शाखाओं की समय-समय पर छंटाई करें।
* अत्यधिक गर्मी के दौरान पौधों पर तनाव के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत संरक्षण उपाय अपनाएं।