Sugarcane Crop Protection : जून में गन्ने के खेतों पर मंडरा रहा बड़ा खतरा, किसान तुरंत हो जाएं सतर्क

    30-May-2026
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Sugarcane Crop Protection :
जून का महीना आते ही गन्ने की खेती के लिए बेहद अहम् माना जाता है। इस दौरान बढ़ता तापमान और मौसम में आने वाला बदलाव गन्ने की फसल के लिए कई तरह की बीमारियों और खतरनाक कीटों के प्रकोप को बढ़ा देता है। कृषि वैज्ञानिकों और गन्ना विकास विभाग ने भी इस समय किसानों को अलर्ट रहने की सलाह दी है।

जून के इस तपने वाले महीने में गन्ने की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान चूसक कीटों से पहुंचता है। जो चुपके से पौधों का रस चूसकर उन्हें अंदर से खोखला बना देते हैं। अगर समय रहते इन कीटों की पहचान और इनका सही इलाज न किया जाए तो गन्ने की ग्रोथ पूरी तरह रुक जाती है और चीनी की मात्रा भी घट जाती है।

ब्लैक बग का बढ़ता हुआ आतंक

जून के गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क मौसम में गन्ने की फसल पर ब्लैक बग (काला चिकटा कीट) का प्रकोप बढ़ जाता है। यह कीट मुख्य रूप से पेड़ी गन्ने की फसल को अपना निशाना बनाता है और पत्तियों के बीच वाले हिस्से में जाकर छिप जाता है। इसके बाद इसके छोटे बच्चे और वयस्क कीट मिलकर गन्ने की पत्तियों का रस चूसना शुरू कर देते हैं।

रस चूसे जाने की वजह से पत्तियों पर कत्थई और पीले रंग के छोटे-छोटे धब्बे बनने लगते हैं और धीरे-धीरे पूरी पत्तियां सूखने लगती हैं। इस कीट के असर से पौधों में प्रकाश संश्लेषण यानी भोजन बनाने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे गन्ने की लंबाई और मोटाई दोनों पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

थ्रिप्स भी पहुंचते हैं नुकसान
ब्लैक बग के अलावा थ्रिप्स नामक सूक्ष्म चूसक कीट भी इस मौसम में सक्रिय हो जाते हैं। इनके हमले के कारण गन्ने की पत्तियां ऊपर की तरफ मुड़ने लगती हैं और पौधों का रंग पीला पड़ने लगता है। इन दोनों ही खतरनाक चूसक कीटों से अपनी फसल को सुरक्षित रखने के लिए किसानों को खेतों में हल्की सिंचाई करते रहना चाहिए ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे।

इन बातों का रखें ध्यान
इसके साथ ही खेत के आसपास उगने वाले खरपतवारों को साफ रखना बहुत जरूरी है। रासायनिक बचाव के लिए कृषि विशेषज्ञों ने सुबह या शाम के समय प्रोफेनोफॉस + साइपरमेथ्रिन या फिर इमिडाक्लोप्रिड जैसी दवाओं का तय मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित और हेल्दी बनी रहती है। दवाओं का चयन, मात्रा और छिड़काव का समय फसल की स्थिति और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है। सुरक्षित और प्रभावी उपयोग के लिए हमेशा लेबल निर्देशों का पालन करें।