Cucumber Crop Protection : यूपी के कई जिलों में इस समय खीरे की खेती किसानों को अच्छा मुनाफा दे रही है, लेकिन बदलते मौसम के बीच अब फसल पर लिब ब्लाइट यानी झुलसा रोग का खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। कृषि वैज्ञानिको ने चेतावनी दी है कि समय रहते अगर इस बीमारी की पहचान और उपचार नहीं किया गया तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है। ब्लाइट यानी झुलसा रोग एक फफूंदजनित रोग है जो न केवल पौधों को सुखा देता है, बल्कि पैदावार को भी भारी नुकसान पहुंचाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र प्रभारी डॉ. आई.के कुशवाहा ने बताया कि गर्मी और अधिक नमी वाले मौसम में यह फफूंदजनित रोग तेजी से फैलता है। इसके लक्षणों को पहचानना बेहद आसान है। अगर आप पौधे की पत्ती के निचले हिस्से को देखेंगे, तो वहां छोटे-छोटे रस चूसने वाले कीट नजर आएंगे। ये कीट पत्तों का रस चूसकर वहां जगह-जगह धब्बे छोड़ देते हैं। यदि पत्तियों पर गोलाकार या टेढ़े-मेढ़े धब्बे दिख रहे हैं और पत्तों में छेद हो रहे हैं, तो समझ लीजिए कि आपकी फसल लिब ब्लाइट की चपेट में है।
यह बीमारी सबसे ज़्यादा तब सक्रिय होती है जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास हो और हवा में नमी अधिक हो। इस स्थिति में तने से गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ निकलने लगता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा सफेद पड़कर सूखने लगता है। किसानों के लिए यह स्थिति सबसे खतरनाक होती है क्योंकि यह संक्रमण पूरे खेत में बहुत तेजी से फैलता है।
बचाव के लिए अपनाएं ये उपायडॉ. कुशवाहा के अनुसार, इस बीमारी पर लगाम लगाने के लिए किसानों को तुरंत कदम उठाने चाहिए. इसके समाधान के लिए ‘इमिडाक्लोप्रिड’ कीटनाशक का छिड़काव करना बेहद प्रभावी रहता है। इसके साथ ही फफूंदी की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए कार्बेन्डाजिम 25% और मैनकोज़ेब 50% के मिश्रण की 2 ग्राम मात्रा को प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना चाहिए। इससे बीमारी की रोकथाम निश्चित रूप से संभव है।
वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि कीटनाशक छिड़कने के कम से कम 4-5 दिन बाद तक खीरे की तुड़ाई न करें। एक बार जब आप फसल की तुड़ाई कर लें, तो उसके बाद दोबारा दवाओं का छिड़काव करें। इससे पौधों का रेस्टिंग पीरियड सही रहता है और अगली बार मिलने वाले फलों की गुणवत्ता भी बनी रहती है।
इसके अलावा किसानों को नियमित रूप से खेतों की निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही तुरंत उपचार शुरू करने की सलाह दी गई है।