
Wheat Lifting In Punjab : रबी विपणन सीजन 2026 में पंजाब की मंडियों से गेहूं निकासी की प्रक्रिया इस बार पहले से ज़्यादा तेज़ नज़र आ रही है। इसका नतीजा यह है कि खरीद केंद्रों पर भीड़भाड़ कम हुई है और व्यवस्था सुचारु हुई है। हालांकि इस वर्ष गेहूं की कुल आवक पिछले साल के मुकाबले थोड़ी कम रही, लेकिन बेहतर लॉजिस्टिक प्रबंधन ने हालात संभाल लिए हैं।
केंद्र सरकार ने बताया कि पंजाब की मंडियों से गेहूं निकासी (लिफ्टिंग) पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर गति से हो रही है, जबकि इस वर्ष फसल आवक थोड़ी कम दर्ज की गई है। इसके परिणामस्वरूप खरीद केंद्रों पर भीड़भाड़ में कमी आई है और मंडियों का संचालन अधिक सुचारू हुआ है। 6 मई 2026 तक पंजाब में गेहूं की प्रगतिशील निकासी 78.96 लाख टन तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 75.63 लाख टन था। हालांकि कुल आवक इस वर्ष लगभग 122 लाख टन रही, जो पिछले वर्ष के 125 लाख टन की तुलना में करीब 3 लाख टन कम है।
मंडियों में दबाव कम करने के लिए खाद्य मंत्रालय ने मई माह में पंजाब के लिए 100 अतिरिक्त “व्हीट स्पेशल” रेल रेक आवंटित किए हैं, जिनकी कुल क्षमता 3 लाख टन है। यह गेहूं उत्तर प्रदेश और दक्षिणी राज्यों में भेजा जाएगा। मई 2026 में देशभर के लिए कुल 354 रेल रेक में से 201 रेक अकेले पंजाब को दिए गए हैं, जो कुल आवंटन का लगभग 60 प्रतिशत है। अप्रैल 2026 में भी पंजाब को 413 में से 234 विशेष रेल रेक मिले थे।
मंडियों से सीधे भंडारण केंद्रों तक गेहूं पहुंचाने की प्रक्रिया को भी तेजी से बढ़ाया गया है। अप्रैल 2026 में लगभग 3.5 लाख टन गेहूं इस व्यवस्था से भेजा गया, जबकि मई में 6.6 लाख टन और जून में 8 लाख टन भेजने की योजना है। कुल मिलाकर इस सीजन में करीब 18 लाख टन गेहूं सीधे डिलीवरी सिस्टम के तहत भेजा जाएगा, जो राज्य सरकारों के अनुरोध के अनुरूप है।
खाद्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने कहा है कि पंजाब की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, क्योंकि देशभर के लगभग 60 प्रतिशत गेहूं की निकासी इसी राज्य से होती है। सरकार का कहना है कि तेज लिफ्टिंग और बेहतर सप्लाई मैनेजमेंट के कारण किसानों और खरीद एजेंसियों दोनों को राहत मिली है।