Yellow Carrot Farming : खेती-किसानी में अब किसान पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर ऐसी फसलों की तलाश में हैं जो कम समय में ज़्यादा मुनाफा दे सके। इसी बीच पीली गाजर की खेती किसानों के लिए ज़्यादा मुनाफे वाला विकल्प बनकर उभरी है। आमतौर पर बाजार में लाल या नारंगी गाजर देखने को मिलती है, लेकिन पीली गाजर अपनी अलग पहचान, स्वाद और सेहतमंद गुणों के कारण किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को आकर्षित कर रही है।
कम समय होगी तैयार पीली गाजर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल बुवाई के लगभग 70 से 80 दिनों के भीतर कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यानी किसान कम समय में एक अच्छी फसल लेकर बाजार में उतार सकते हैं।
कम पानी और कम लागत में बेहतर उत्पादनलाल गाजर की तुलना में पीली गाजर को कम सिंचाई की जरूरत होती है। यह फसल कम पानी में भी अच्छी ग्रोथ कर लेती है, जिससे किसानों का बिजली और सिंचाई खर्च कम हो जाता है। साथ ही इसमें कीट और रोगों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे कीटनाशकों पर खर्च भी घटता है।
सेहतमंद सेहत के लिहाज से भी पीली गाजर फायदेमंद है। यह पोषक तत्वों से भरपूर होती है। इसमें ल्यूटिन, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो आंखों की रोशनी और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माने जाते हैं।आजकल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता इसे सलाद, जूस और हलवे के रूप में तेजी से पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
सप्लाई कम है डिमांड ज़्यादा फिलहाल अभी बाजार में पीली गाजर की सप्लाई कम और डिमांड ज्यादा है। इसी वजह से किसानों को इसके लिए उच्च और प्रीमियम कीमत मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान थोड़ी योजना और सही तकनीक के साथ इसकी खेती करें, तो यह फसल उनके लिए शॉर्ट टर्म हाई प्रॉफिट मॉडल साबित हो सकती है।