
PMFBY : बीते काफी दिनों से चर्चा है कि अल नीनो की दस्तक होने वाली है। अब भारत में गर्मियों के बीच अल नीनो की दस्तक हो चुकी है जिसका बुरा असर खेती किसानी पर भी देखने को मिल रहा है। मौसम में अचानक बदलाव के कारण कहीं सूखे की स्थिति बन रही है तो कहीं बेमौसम बारिश किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है। ऐसे अनचाहे संकट से किसानों को बचाने और उनकी जेब को सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार की एक बेहद शानदार स्कीम काम आती है।
इस योजना का नाम है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)। यह योजना प्राकृतिक आपदा, सूखा, बाढ़ या मौसम की अन्य मार से फसल खराब होने पर यह योजना किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है। आज के डिजिटल दौर में इस सरकारी स्कीम का लाभ उठाना और अपनी फसल को सिक्योर करना बेहद आसान हो चुका है। आइये बताते हैं कि कैसे ?
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसानों को बहुत कम प्रीमियम देना पड़ता है। खरीफ की फसलों के लिए सिर्फ दो प्रतिशत, रबी की फसलों के लिए डेढ़ प्रतिशत और कमर्शियल या बागवानी फसलों के लिए अधिकतम पांच प्रतिशत प्रीमियम तय किया गया है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा सरकार खुद भरती है।
किसान योजना के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर इंश्योरेंस कैलकुलेटर की मदद से अपनी फसल का प्रीमियम आसानी से जान सकते हैं। इसके लिए आपको बस पोर्टल पर अपनी स्टेट, क्रॉप, डिस्ट्रिक्ट और जमीन का एरिया सिलेक्ट करना होता है। यह मॉडर्न और डिजिटल तरीका किसानों को किसी भी एजेंट के चक्कर काटे बिना पूरी ट्रांसपेरेंसी के साथ घर बैठे सारी कैलकुलेशन समझने में मदद करता है।
अगर अल नीनो के कारण सूखा पड़ता है या आपकी फसल को नुकसान पहुंचता है तो आपको घटना के 72 घंटों के भीतर इसकी जानकारी सीधे इंश्योरेंस कंपनी, लोकल एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट या टोल-फ्री नंबर पर देनी होती है। सूचना बीमा कंपनी, कृषि विभाग या टोल-फ्री नंबर के माध्यम से दी जा सकती है। इसके बाद अधिकारी खेत का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन करते हैं और रिपोर्ट के आधार पर क्लेम की राशि सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाती है।
अपने एप्लीकेशन का स्टेटस चेक करने के लिए आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप पीएम फसल बीमा योजना के पोर्टल पर जाकर एप्लीकेशन स्टेटस पर क्लिक कर सकते हैं। वहां अपना रसीद नंबर या एप्लीकेशन नंबर डालकर आप एक क्लिक में देख सकते हैं कि आपका क्लेम कहाँ तक पहुँचा है।
बदलते मौसम और बढ़ते जलवायु संकट के दौर में यह स्कीम किसानों के लिए एक सॉलिड सपोर्ट सिस्टम की तरह काम करती है।