Machan Technique In Monsoon : मानसून किसानों के लिए उम्मीदें लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही लेकर आता है किसानों के लिए चिंता की लकीरें। चिंता इस बात की कि इसके साथ ही भारी बारिश, जलजमाव और फसलों के खराब होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
पारंपरिक तरीके से जमीन पर की जाने वाली सब्जियों की खेती अक्सर भारी बारिश और जलजमाव की वजह से पूरी तरह तबाह हो जाती है लेकिन आज के आधुनिक दौर में समझदार किसान पुरानी तरीके छोड़ नई तकनीकों को अपना रहे हैं, जिनमें मचान विधि तेजी से लोकप्रिय हो रही है।
मचान तकनीक में सब्जियों की बेलों को जमीन पर फैलाने के बजाय बांस, लकड़ी और रस्सियों की मदद से ऊपर की ओर चढ़ाया जाता है। इस बेहतरीन जुगाड़ और तकनीक का इस्तेमाल करके आप बरसात के मौसम में भी अपनी एक-एक फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। बारिश के पानी से होने वाले नुकसान से बचकर सब्जियों की खेती करने और मार्केट में अपनी उपज को ऊंचे दामों पर बेचकर अच्छा प्रॉफिट कमाने का यह सबसे सटीक और प्रैक्टिकल तरीका बन चुका है।
मचान तकनीक
मचान तकनीक में सब्जियों के पौधों को जमीन पर फैलाने के बजाय बांस, लकड़ी और प्लास्टिक की रस्सियों या जालों के सहारे ऊपर की तरफ चढ़ाया जाता है। किसान सबसे पहले अपने खेतों की अच्छी तरह जुताई करके ऊंची क्यारियां और मेड़ तैयार करते हैं, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से निकल सके और जड़ों में जलभराव न हो।
जब बेल वाली सब्जियों के पौधे थोड़े बड़े होने लगते हैं, तब खेत में मजबूत बांस गाड़कर रस्सियों का एक मजबूत ढांचा या मचान बना दिया जाता है।
आसान तरीका
इस मचान के सहारे लौकी, तोरई, करेला और खीरे जैसी सब्जियों की बेलें ऊपर चढ़ जाती हैं और हवा में फैलती हैं. जमीन से ऊपर रहने के कारण पौधों को भरपूर धूप और हवा मिलती है, जिससे उनकी ग्रोथ बहुत तेजी से होती है।
बरसात में कारगर
जब सब्जियां जमीन के संपर्क में नहीं आतीं तो मिट्टी की नमी और कीचड़ के कारण होने वाले फंगस या सड़न की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाती है। मचान पर लटकी हुई सब्जियां बिल्कुल साफ, सीधी और चमकदार होती हैं, जिससे मार्केट में उनकी क्वालिटी देखते ही बनती है और व्यापारियों से इसके प्रीमियम दाम मिलते हैं।
बारिश के सीजन में जब आम किसानों की फसलें पानी में डूबकर खराब हो जाती हैं। तब मचान विधि अपनाने वाले किसान मार्केट में 30 से 40 रुपये प्रति किलो या उससे भी महंगे रेट पर अपनी तोरई और लौकी बेचते हैं।
इतनी हो सकती है कमाई
महज दो से तीन बीघे के छोटे से खेत में इस तकनीक को शुरू करके किसान भाई सीजन में दो से तीन लाख रुपये का शुद्ध और बंपर प्रॉफिट बहुत आराम से कमा लेते हैं। यह तकनीक न केवल आपकी फसल को सौ फीसदी सुरक्षा देती है। बल्कि कम लागत में आपकी आमदनी को सीधे दोगुना से तीन गुना तक बढ़ा देती है।
मचान विधि न केवल फसल की गुणवत्ता सुधारती है, बल्कि मौसम की अनिश्चितताओं के बीच किसानों को बेहतर उत्पादन और अधिक आय का अवसर भी प्रदान करती है।