
Mango Grafting Technique : क्या आपने कभी ऐसा पेड़ देखा है जिसमे एक ही पेड़ में कई किस्मों के आम लगे हों ? पहली नज़र में यह किसी जादू से कम नहीं लगता। दरअसल, यह कोई जादू नहीं बल्कि वैज्ञानिक तकनीक का कमाल है। आजकल यह तकनीक किसानों और बागवानी के शौकीनों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि इसकी मदद से कम जगह में ज्यादा किस्मों के फल उगाए जा सकते हैं। खासतौर पर आम के पेड़ और सब्जियों में इसका इस्तेमाल काफी ज्यादा हो गया है।
ग्राफ्टिंग तकनीकग्राफ्टिंग एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों या टहनियों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है।
इसमें एक पौधे की जड़ और तना, जिसे रूटस्टॉक कहा जाता है, तथा दूसरे पौधे की टहनी या कलम, जिसे साइयन कहा जाता है, को आपस में जोड़ा जाता है। जब ये दोनों हिस्से सही तरीके से जुड़ जाते हैं, तो वे एक ही पौधे की तरह बढ़ने लगते हैं। इस तकनीक की मदद से एक पेड़ पर अलग-अलग किस्म के फल उगाए जा सकते हैं।
आम के पेड़ के लिए कैसे होगी ग्राफ्टिंग
अगर आपके घर में कम जगह है और आप एक ही पेड़ पर आम की कई किस्में उगाना चाहते हैं तो यह एक बेहतर तरीका है। इसके लिए आपको सबसे पहले एक हेल्दी और मजबूत रूटस्टॉक यानी जड़ वाले पौधे को चुनना है। इसके बाद जिन किस्मों के आम उगाने हैं, उनकी स्वस्थ और ताजी टहनियां लें।
पेड़ की शाखा पर हल्का कट लगाकर दूसरी किस्म की टहनी को उसमें फिट करें और प्लास्टिक टेप या ग्राफ्टिंग टेप से अच्छी तरह बांध दें। ध्यान रखें कि दोनों हिस्सों का कॉन्टैक्ट सही तरीके से हो, तभी यह टेक्नीक काम करेगी। कुछ हफ्तों बाद जब नई पत्तियां निकलने लगती हैं, तो समझ लीजिये कि ग्राफ्टिंग सफल रही है।
ग्राफ्टिंग के बाद आम के पेड़ की देखभाल के टिप्स
अगर आप ग्राफ्टिंग की मदद से फल उगा रहे हैं तो इसकी देखभाल करना भी जरूरी है। शुरुआत में ग्राफ्टिंग वाले पौधे को हल्की धूप में रखना होता है। साथ ही मिट्टी को बहुत ज्यादा गीला होने से भी बचाना चाहिए। बहुत ज्यादा पानी देने से जड़े खराब हो सकती है।
सबसे जरूरी बात समय-समय पर सूखी या कमजोर शाखाओं को हटाते रहें, ताकि पौधे की एनर्जी सही विकास में लग सके। समय-समय पर जैविद खाद का भी इस्तेमाल करें। इससे पेड़ की ग्रोथ अच्छी होती है और फल भी जल्दी आते हैं।
ग्राफ्टिंग टेक्नीक के फायदे
* एक ही पेड़ पर कई किस्मों के फल उगाए जा सकते हैं।
* इससे कम जगह में ज्यादा उत्पादन होता है।
* पौधों की क्वालिटी और प्रोडक्शन क्षमता बेहतर होती है।
* फल जल्दी आने की संभावना होती है।
* बागवानी में विविधता और आकर्षण बढ़ता है।