नई दिल्ली।लीची की बागवानी सबसे ज्यादा बिहार में और उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा होती है। लीची अपनी मिठास और खुशबू के लिए दुनिया भर में मशहूर है। आप आपने लीची की बागवानी की है तो जनवरी की महीना शुरू हो चुका है। यह बेहद खास महीना है। हमारे देश से लीची का बड़े पैमाने पर निर्यात होता है, लेकिन बाज़ार में अच्छे दाम तभी मिलते हैं जब फल आकार में बड़े, मीठे और चमकदार हों। अक्सर खाद, पानी और कीट प्रबंधन में लापरवाही की वजह से फलों की क्वालिटी खराब हो जाती है।
बेहतर पैदावार के लिए करें यह काम
लीची के पेड़ में मंजर आने से लेकर फल बनने तक का समय सबसे संवेदनशील होता है। इस दौरान सबसे बड़ी सावधानी सिंचाई को लेकर रखनी चाहिए। जब पेड़ों पर फूल आ रहे हों तो उस समय भूलकर भी सिंचाई या पटवन नहीं करना चाहिए। अगर इस समय पानी दिया गया, तो फूल झड़ सकते है।
अधिक बौर कैसे लाए
लीची के 12 वर्ष से अधिक उम्र के पेड़ों को सही पोषण देना अनिवार्य है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ पेड़ को साल भर में लगभग 750 ग्राम नाइट्रोजन, 500 ग्राम फास्फोरस और 750 ग्राम पोटाश की जरूरत होती है।
कीट और रोग प्रबंधन
लीची में बौर आने के समय और फल बनने के बाद कीटों का हमला सबसे अधिक होता है। जब 50 प्रतिशत फूल खिल चुके हों, तब किसी भी रासायनिक कीटनाशक का नहीं छिड़काव करें, क्योंकि इससे मित्र कीट मर सकते हैं मंजर निकलने पर नीम के तेल 4 मिली प्रति लीटर या नीम बीज अर्क का छिड़काव करें, ताकि कीट अंडे न दे पाएं।