
नई दिल्ली। आज के दौर में खेती केवल मिट्टी और बीज का खेल नहीं रह गई है, बल्कि यह बदलते मौसम के साथ तालमेल बिठाने की चुनौती बन गई है। जब बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पारंपरिक खेती को एक जुआ बना देती है, तब पॉलीहाउस एक अभेद्य सुरक्षा कवच की तरह सामने आता है।
हर समय बैमौसम फल प्राप्त करें
अब स्थानीय संसाधनों और सरकारी मदद के जरिए आप कम बजट में भी अपना पॉलीहाउस खड़ा कर सकते हैं। यह मात्र एक प्लास्टिक का ढांचा नहीं, बल्कि मुनाफे की वह गारंटी है जो किसान को मौसम की गुलामी से आजाद करती है। यहां आप साल के 12 महीने, बाजार की मांग के अनुसार अपनी मर्जी की प्रीमियम फसलें उगा सकते हैं।
सरकारी सब्सिडी-आधी लागत सरकार देगी
भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलीहाउस बनाने के लिए 50 फीसदी से 80 फीसदी तक की सब्सिडी देती हैं।अपने जिले के उद्यान विभाग में संपर्क करें।दस्तावेज आधार कार्ड, जमीन के कागज खसरा-खतौनी, बैंक पासबुक और सॉइल टेस्टिंग रिपोर्ट सब्सिडी मिलने के बाद आपकी जेब से लगने वाली लागत आधी रह जाती है।