चित्रकूट के किसान इस तरीके से कर रहे हैं फूलों की खेती,

21 Jan 2026 19:29:20


चित्रकूट।चित्रकूट को अब तक खेती-किसानी के लिहाज से पिछड़ा इलाका माना जाता रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां की पथरीली जमीन और सीमित सिंचाई संसाधन रहे हैं,लेकिन बदलते समय के साथ अब चित्रकूट के किसान भी परंपरागत फसलों से आगे निकलकर बागवानी और फूलों की खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। खास बात यह है कि कभी कभी किसान जानकारी के अभाव से गलत कदम उठा लेते हैं, जिससे उनको बागवानी और खेती में नुकसान भी हो जाता है।

इतने फिट का होना चाहिए गड्ढा

बागवानी विशेषज्ञ के अनुसार किसान को सबसे पहले यह तय करना चाहिए कि पौधारोपण किस स्थान पर किया जाएगा। जमीन में पौधा लगाने से पहले गड्ढे की तैयारी सबसे अहम चरण है। गड्ढा कम से कम 2×2 फीट का होना चाहिए, ताकि गर्मी के मौसम में पौधों की जड़ों में नमी बनी रहे

पौधा लगने से पहले ये कार्य

बरसात शुरू होते ही गड्ढे में करीब एक फीट तक गोबर की खाद और मिट्टी का मिश्रण भरना चाहिए,इसके बाद पौधे की पिंडी को सावधानी से दबाकर ऊपर से हल्की मिट्टी डालनी चाहिए। पौधे को हवा से बचाने के लिए बगल में बांस या लकड़ी के डंडे का सहारा देना जरूरी है, ताकि तेज हवा में पौधा हिले नहीं और जड़ें मजबूत बनें। इस विधि से चित्रकूट के किसान अमरूद, आंवला, नींबू जैसे फलों की बागवानी कर बेहतर उत्पादन ले सकते हैं।

फूलों की खेती में रखे इन बातों का ध्यान

गुलाब या अन्य सजावटी फूलों के लिए एक फीट गहरा गड्ढा पर्याप्त होता है,पौधों के बीच करीब दो मीटर की दूरी रखनी चाहिए और जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए।सही देखभाल के साथ फूलों की खेती कम समय में तैयार हो जाती है और नियमित आमदनी का जरिया बनती है।

 

 


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