बसंत के आगमन के संकेत देता है यह फूल,इस राज्य के संस्कृति का है हिस्सा

    27-Jan-2026
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देहरादून।प्योली के फूल का आपने नाम सुना है क्या? यह बसंत के आगमन में बाद खिलने वाले प्रमुख फूलों में एक है। इस फूल उत्तराखंड की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का हिस्सा माना ताजा है। इसे खासतौर पर फूलदेई त्योहार में देहली पर चढ़ाया जाता है। हाल ही में वसंत पंचमी बीत चुका है बसंत पंचमी पर भी इस फूल का विशेष महत्त्व है। इसमें कोई खास खुशबू नहीं होती, लेकिन इसकी चमकीली पीली रंगत इसे खास बनाती है। जैसे ही यह फूल खिलता है पडाड़ों में इस फूल की खिलने का संकेत माना जाता है।

इस फूल से मनाई जाती है फूलदेई

इस फूल की खूबसूरती के कारण उत्तराखंड के कई साहित्कारों और संगीतकारों में अपनी रचना में इसकी जिक्र किया है। इस फूल को लेकर कई कवियों, साहित्यकारों और कहानीकारों ने भी रचनाएं की हैं, फूलदेई जैसे पर्वों पर बच्चे इस फूल को तोड़कर घर-घर जाकर बधाई देते हैं। यह फूल पहाड़ी परंपराओं का एक खास हिस्सा बन चुका है।

फूल खिलते ही लोग खुशी मनाते है

प्योली को लेकर कई लोककथाएं और किवदंतियां भी प्रचलित हैं। इनमें इसे प्रेम और सौंदर्य का प्रतीक माना गया है। यह फूल न केवल अपनी खूबसूरती से पहाड़ों को सजाता है, बल्कि यह पहाड़ी जीवन और संस्कृति से जुड़ी अनमोल धरोहर भी है। हर साल इसके खिलने से पहाड़ी इलाकों में खुशी और उल्लास का माहौल बनता है।