
नई दिल्ली।ज्यादा कमाई करने के लिए युवा बड़े-बड़े शहर में जाने है,लेकिन पंजाब के मानसा जिले के गांव कुलरियां की अमनजीत कौर ने नई मिसाल पेश की है। उन्होंने विदेश जाने का रास्ता चुनने की बजाए उन्होंने फूलों की खेती की रास्ता अपनाया। फूलों की खेती न केवल उनकी सहारा बनी बल्की अपनी पढ़ाई का खर्च भी खुद उठाने लगीं। गांव कुलरियां निवासी किसान जीता सिंह के पास करीब सवा दो एकड़ जमीन है, जिससे दो बेटों और एक बेटी वाले परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा था। 25 वर्षीय अमनजीत कौर ने भी विदेश जाने के लिए आईलेट्स किया था, लेकिन कमजोर आर्थिक हालात के चलते यह सपना पूरा नहीं हो सका। इसी दौरान गांव के गुरुद्वारा साहिब में फूलों की सजावट करते हुए उनके मन में फूलों की खेती का विचार आया, जिसने उनकी सोच और भविष्य दोनों बदल दिए।
बागवानी विभाग से किया सम्पर्क
अमनजीत ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के बागवानी विभाग से संपर्क किया। वहां फ्लोरीकल्चर विभाग के एचओडी डॉ. परमिंदर सिंह और वैज्ञानिक डॉ. अमन शर्मा के मार्गदर्शन में उन्होंने सात मरला जमीन में गेंदा फूल की खेती शुरू की। शुरुआती प्रयास सफल रहा और उन्हें अच्छा आर्थिक सहारा मिला।
फूलों की खेती से बेहतर आमदनी
उनके उगाए गए फूल बरेटा, बुढलाडा, मानसा, सुनाम, बठिंडा, जाखल और लुधियाना जैसे शहरों में भेजे जा रहे हैं। गेंदा फूल साल में तीन बार तोड़ा जाता है, जिससे करीब 40 हजार रुपये तक की बचत हो जाती है, जो एक एकड़ धान-गेहूं की आमदनी के बराबर मानी जाती है। अमनजीत बागवानी विभाग के लगातार संपर्क में हैं और विभाग की ओर से उन्हें समय-समय पर तकनीकी मार्गदर्शन भी मिलता है।