
नई दिल्ली।वाराणसी जिले के लमही गांव क्षेत्र में विशाल भारत संस्थान के सुभाष भवन में सोमवार को एमएसएमई, सुगंध और सुरस विकास केंद्र विस्तार इकाई कानपुर और साईं इंस्टिट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट की ओर से एक दिवसीय उद्यमिता जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। इस कार्यशाला का प्रमुख विषय सुगंधित पौधों की खेती और विपणन रहा। इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. भक्ति विजय शुक्ला ने दीप प्रज्वलन के साथ किया। आजाद हिंद बटालियन की ओर से सेनापति दक्षिता भारतवंशी के नेतृत्व में अतिथियों को सलामी दी गई। साईं इंस्टिट्यूट के निदेशक अजय सिंह ने कहा कि सुगंधित और औषधीय पौधे देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। रिसर्च साइंटिस्ट प्रिया सिंह ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को उद्यमिता आधारित प्रशिक्षण की अत्यधिक आवश्यकता है।
औषधीय पौधों की खेती के लाभ
औषधीय पौधों की खेती किसानों के लिए उच्च लाभ, कम लागत और कम पानी की आवश्यकता के कारण फायदेमंद है, जो उन्हें पारंपरिक फसलों से हटकर आय और फसल विविधीकरण प्रदान करती है।इससे रोजगार, निर्यात के अवसर बढ़ते हैं।मिट्टी की उर्वरता में सुधार होता है और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण आर्थिक स्थिरता आती है, साथ ही सरकार से भी समर्थन मिलता है।
ग्रामीण महिलाएं समूह बनाकर करती है बागवानी
ग्रामीण महिलाएं जैविक समूह बनाकर बागवानी कर रही हैं, जो जैविक खेती को बढ़ावा दे रहा है। जो आय बढ़ा रहा है, और स्वास्थ्य में सुधार कर रहा है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और समृद्धि का प्रतीक है।