भारत के साथ-साथ विदेशों तक जाता है इस गांव की नर्सरी में तैयार गेंदा के पौधे

    11-Feb-2026
Total Views |

वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले के बैरवन गांव के किसान गेंदा की खेती कर रहे है। इस गांव के किसान पहले परंपरागत तरीके से खेती कर रहे थे, जिससे उन्हे बेहतर कमाई नहीं हो रही थी। जिसके बाद किसानों ने फूलों की खेती को अपनाया। इस गांव में गेंदे की खेती के साथ-साथ नर्सरी भी स्थापित है।

महिलाएं तैयार करती है गेंदा की नर्सरी

कभी बेर के बगीचों के लिए पहचाना जाने वाला बैरवन गांव अब गेंदे के फूलों की पौधे के लिए जाना जाता है। इस बदलाव की अगुवाई गांव की औरतों ने की है। इस बदलाव की अगुवाई गांव की औरतों ने की है। वे साल भर गेंदे की पौध तैयार करती हैं और गेंदे के फूल पूर्वांचल के जिलों से लेकर नेपाल और बांग्लादेश तक भेजती हैं। करीब 4000 की आबादी वाले इस गांव में बड़ी संख्या में महिलाएं गेंदे की खेती से जुड़ी हैं। पौध तैयार करने, रोपाई, देखभाल और पैकिंग तक हर काम महिलाएं खुद संभालती हैं।

इन  स्थानों पर भेजे जाते है पौधे

बता दें कि चार-पांच बिस्वा जमीन पर लगे गेंदे की नर्सरी से गांव की लोगों की आजीविका टिकी होती है। गेंदे की खेती का काम औरतें संभालती हैं और पुरुष मजदूरी या दूसरे काम करने शहर चले जाते हैं। बैरवन गांव के गेंदे की पौध मिर्जापुर, सोनभद्र, कानपुर, लखनऊ, इलाहाबाद, गोंडा, चंदौली समेत पूर्वांचल के सभी जिलों के साथ ही बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड के साथ-साथ नेपाल की राजधानी काठमांडो और बांग्लादेश के ढाका तक भेजी जाती है।