करें ग्रेपफ्रूट की बागवानी, कई रोगों में करता है दवाई का काम

    18-Feb-2026
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नई दिल्ली।ग्रेपफ्रूट आज के बदलते समय का सबसे बेहतर फल माना जाता है। पंजाब की उप-उष्णकटिबंधीय जलवायु इसकी अच्छी पैदावार कर रही है। वैसे इस फल की खोज 18वीं सदी में बारबाडोस में हुई थी। यह सेहत के लिए काफी फादयदेमंद माना जाता है। बढ़ती बाजार मांग को देखते हुए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ इसकी बागवानी करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे है।

एक पेड़ से 93 किलो फल

पंजाब के लिए सफेद और लाल गूदे वाली कई किस्में सुझाई गई है, जैसे डंकन, मार्श सीडलैस, फोस्टर, रेड ब्लश, स्टार रूबी और फ्लेम बीजरहित किस्में उपभोक्ताओं और व्यापारियों में ज्यादा लोकप्रिय हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मार्श सीडलैस से एक पेड़ पर लगभग 93 किलो फल मिलता है, जबकि फ्लेम और रेड ब्लश से 74 से 76 किलो तक उत्पादन होता है।

ग्रेपफ्रूट का है औषधीय महत्व

ग्रेपफ्रूट में शुगर, वसा और प्रोटीन कम मात्रा में होते हैं, जबकि फाइबर और पोटैशियम भरपूर होता है। आधा फल खाने पर करीब 52 कैलोरी, 13.2 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 8.5 ग्राम शुगर, 0.9 ग्राम प्रोटीन और 38.4 मिलीग्राम विटामिन C मिलता है। इस लिहाज से ग्रेपफूट स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के रिसर्च स्टेशन के वैज्ञानिक कृष्ण कुमार के अनुसार, इसमें सूजन कम करने और कैंसर-रोधी गुण भी पाए जाते हैं, जिससे इसका औषधीय महत्व बढ़ जाता है।