नई दिल्ली।फरवरी आते ही मार्केट में बेर की आवक बढ़ जाती है। क्योंकि सरस्वती पूजा और महाशिवरात्रि के लिए बेर की मांग बढ़ जाती है। लेकिन कई लोगों का कहना है कि उन्हें बेर खाना अच्छा नहीं लगता है। क्योंकि अधिकांश बेर स्वाद में खट्टे होते हैं। कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, फरवरी की धूप के साथ ही बेर की फसल पकने और मीठी होने लगती है। लेकिन इस समय थोड़ी सी लापरवाही से फल छोटे, खट्टे या बेस्वाद रह सकते हैं।
कम पानी से फल छोटे और सख्त रह जाते हैं
फरवरी में धूप तेज हो जाती है, जिससे मिट्टी की नमी जल्दी सूखने लगती है। ऐसे में बेर के पौधों को पानी देना जरूरी है, लेकिन सिंचाई संतुलित होनी चाहिए। ज्यादा पानी देने से फल फट सकते हैं।
मिठास बढ़ाने में पोटैशियम की अहम भूमिका
बेर की मिठास बढ़ाने में पोटैशियम की अहम भूमिका होती है। फरवरी के पहले हफ्ते में पौधे के आसपास हल्की गुड़ाई कर सल्फेट ऑफ पोटाश की थोड़ी मात्रा डालनी चाहिए। इससे फल का आकार बढ़ता है और उनमें शुगर की मात्रा भी बढ़ती है।