
जयपुर।राजस्थान के भरतपुर जिले में भुसावर और छोकरवाड़ा क्षेत्र के किसान पारंपरिक फसलों के बजाय विभिन्य तरह की बागवानी कर रहे है। इस क्षेत्र के किसान अब आंवले की बागवानी से बेहतर कमाई कर रहे है। इन क्षेत्रों में पैदा होने वाले आंवला अपने बड़े आकार, मोटाई और बेहतरीन गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। इसकी बढ़ती मांग का सबसे बड़ा कारण इसकी गुणवत्ता है, जो बाजार में इसे अन्य क्षेत्रों के मुकाबले बेहतर साबित करती है। यहां की आंवले की मांग अचार के साथ-साथ औषधिय उद्योग में किया जाता है।
यहां की मिट्टी आंवले की लिए उपजाउ
भुसावर और छोकरवाड़ा की मिट्टी और जलवायु इस औषधीय फल की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है।यहाँ की उत्पादित आंवले में प्राकृतिक स्वाद और औषधीय गुण भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। बेहतर पैदावार के चलते किसान अपनी उपज को न केवल स्थानीय मंडियों में, बल्कि आसपास के कई जिलों में भी आसानी से बेच पा रहे हैं।
कम लागत में अधिक मुनाफा
आंवले की बागवानी इस लिए खास मानी ताजी है क्योंकि इसमें लागत अपेक्षाकृत काफी कम आती है। अन्य पारंपरिक फसलों की तुलना में इसके पौधों का रखरखाव भी बेहद आसान है।एक बार आंवले के पौधे तैयार हो जाने के बाद वे कई वर्षों तक लगातार अच्छी पैदावार देते रहते हैं।