
लखनऊ।उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के वजीरगंज कस्बे में एक युवा किसान ने अपनी सोच और मेहनत से खेती की तस्वीर बदल दी है। वजीरगंज का यह इलाका आमतौर पर बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां के जाकिर अली ने परंपरागत खेती से हटकर गुलाब उगाने का फैसला किया।
क्यों चुना गुलाब की खेती का रास्ता?
जाकिर अली का मानना है कि जो काम सब कर रहे हैं, उससे हटकर कुछ करने पर ही अच्छी कमाई संभव है। जाकिर बताते हैं कि गुलाब की एक बार रोपाई करने के बाद लगभग 5 से 6 साल तक लगातार फूल मिलते हैं। पौधा लगाने के मात्र 6 महीने बाद ही फूल तैयार होने लगता है।
10 हजार की लागत से शुरू हुआ खेती का सफर
जाकिर अली को गुलाब की खेती का विचार एक अन्य किसान को देखकर आया। इसके बाद उन्होंने खुद काफी रिसर्च की और बहुत ही छोटे स्तर पर जब उन्हें मुनाफा दिखने लगा, तो उन्होंने रकबा बढ़ाकर 2 एकड़ कर दिया। आज उनके खेत से रोजाना लगभग 60 से 70 किलो देसी गुलाब तोड़े जाते हैं, जिन्हें तुरंत मंडियों में भेज दिया जाता है।