मध्य प्रदेश के किसान कर रहें है विदेशी मुल के फूलों की खेती

    06-Feb-2026
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भोपाल।मध्य प्रदेश में किसान अनेक प्रकार के फूलों की खेती कर रहे है। मध्य प्रदेश कृषि शुरू से ही समृद्ध रही है। यहां के किसान अब परंपरागत खेती से हटकर विभिन्य प्रकार के फूलों की खेती कर रहे है। मध्य प्रदेश के कई जिलों में रंग-बिरंगे फूलों की खेती की जा रही है। पाली हाउस में उगाए जा रहे लिसियांथस, जरबेरा और डच रोज जैसे विदेशी फूल न सिर्फ खेतों की तस्वीर बदल रहे हैं, बल्कि किसानों को बेहतर कमाई भी हो रही है।

विदेशी फूलों की हो रही है खेती

हाल ही में राजधानी भोपाल में आयोजित पुष्प प्रदर्शनी में अनेक प्रकार के फूलों को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे राज्य में फूलों की खेती हो रही है। फूलों की उत्पादन करने में मध्य प्रदेश का दूसरा बड़ा स्थान है। धार जिले का बदनावर गांव इस बदलाव का केंद्र बनकर उभरा है। यहां 1048 बीघा क्षेत्र में फूलों की खेती हो रही है। किसान गेंदा, गुलाब और जरबेरा के साथ विदेशी प्रजाति के फूलों का उत्पादन कर देशभर की मंडियों तक भेज रहे हैं।

लिसियांथस की खेती से बेहतर कमाई

खेती मैक्सिको मूल का लिसियांथस बदनावर के किसानों के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित हुआ। गुलाब जैसी खूबसूरती और कांटों रहित यह सजावटी फूल बाजार में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सफेद, गुलाबी, बैंगनी और नीले रंगों में मिलने वाला यह फूल लंबे समय तक ताजा रहता है।

यह गांव बना फ्लोरीकल्चर

हब बदनावर के ग्राम रूपाखेड़ा में 10 से 12 किसान पाली हाउस में लिसियांथस की खेती कर रहे हैं और जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद, पुणे व भोपाल की मंडियों तक फूल भेजते हैं। बदनावर के बाद सरदारपुर और मनावर तहसील के किसान भी इस लाभकारी खेती से जुड़ रहे हैं।