
मंडी।हिमाचल प्रदेश के थुनाग सराज क्षेत्र के बागवान सेब की पारंपरिक खेती से निराश होकर जापानी फल की बागवानी अपना रहे हैं। सराज के थुनाग उपमंडल में इस वर्ष 10 हजार से अधिक जापानी फल के पौधे लगाए गए हैं। बगस्याड़, जंजैहली, संगलबाड़ा और ढीम कटारू जैसे सेब-प्रधान इलाकों में अब जापानी फल के बगीचे लगाए जा रहे हैं। धार जरोल, रोड़, चिऊणी, बहलीधार और धरवारथाच में भी जापानी फल के पौधे रोपे जा रहे हैं।
सेब की तुलना में जपानी फल की बागवानी में कम लागत
बागवानों का कहना है कि सेब की फसल अब खर्चीली हो गई है। मौसम की मार झेलना मुश्किल है और विदेशी सेबों के बढ़ते आयात से स्थानीय सेब को उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। जापानी फल सेब की तुलना में कम लागत वाला और अधिक लाभदायक विकल्प साबित हो रहा है।
बागवानी विभाग उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वितरित कर रहा है
कुल्लू-मंडी में बागवानी विभाग उच्च गुणवत्ता वाले पौधे वितरित कर रहा है। सराज के बागवान उम्मीद कर रहे हैं कि जापानी फल से उनकी आय बढ़ेगी, जिससे सेब की निर्भरता कम होगी। वर्तमान मौसम अनुकूल है और 15 फरवरी तक नए पौधे लगाए जा सकते हैं। उन्होंने बागवानों को जापानी फल का बगीचा पूर्णतया आर्गेनिक तरीके से तैयार करने की सलाह दी है।