
जालना।महाराष्ट्र के जालना जिले के पानशेंद्रा गांव के किसान सुरज मद्दलवार ने पारंपरिक फसल जैसे कपास और सोयाबीन की बजाय फूलों की खेती को अपनाकर सफलता की नई कहानी लिखी है। तीन पीढ़ियों से फूलों की खेती करने वाले मद्दलवार परिवार ने अब आधुनिक तकनीकों के साथ इसे और अधिक लाभदायक बना दिया है।सुरज लगभग 8 से 10 एकड़ जमीन पर कई प्रकार के फूल उगा रहे हैं। इनमें बिजली, गलांडा, गेंदे का फूल, निशिगंधा, एस्टर और डच रोज शामिल हैं। हर फूल की अलग पैदावार और बाजार मांग उन्हें अच्छे दाम दिलाती है।
एकड़ पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये खर्च
फूलों की खेती में एक एकड़ पर लगभग 50 से 60 हजार रुपये खर्च होते हैं। लेकिन इससे दो से ढाई लाख रुपये तक की आमदनी होती है, यानी करीब दो लाख रुपये शुद्ध मुनाफा। इस तरह सालाना कुल आय लगभग 15 से 20 लाख रुपये तक पहुंच जाती है।
फूलों की मांग हमेशा बनी रहती है
फूलों की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इनकी मांग पूरे साल बनी रहती है। शादी, समारोह, त्योहार और धार्मिक कार्यक्रमों में फूलों की भारी मांग रहती है, जिससे बाजार में हमेशा अच्छे दाम मिलते हैं।