
नई दिल्ली।भारत में नीबू वर्गीय फसलें-जैसे नींबू, कागजी नींबू, संतरा, मौसमी और किन्नू-किसानों की आय का एक महत्वपूर्ण सोर्स माने जाते हैं। बिहार के समस्तीपुर के डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में कृषि वैज्ञानिक डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार मार्च में सर्दी धीरे-धीरे खत्म होती है। तापमान बढ़ने लगता है और वसंत ऋतु का प्रभाव दिखाई देता है। यह मौसम पौधों में नई कोंपलें निकलने, फूल बनने और फल बनने की प्रक्रिया के लिए बेहद अनुकूल होता है।
मार्च में नींबू के पौधे में फूल आना शुरू हो जाता है
अगर आप नींबू की बागवानी करना चाहते है, तो पौधा में बेहतर फल आता है। इसलिए मार्च महीने में किए जाने वाले जरूरी कृषि कार्यों की जानकारी किसानों के लिए बेहद जरूरी है। मार्च महीने में नींबू के पौधों में नई कोंपलें निकलने लगती हैं और कई किस्मों में फूल आने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाती है।
खाद और पोषण प्रबंधन
मार्च महीने में पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व देना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि इसी समय पौधे नई वृद्धि के कारण अधिक ऊर्जा लेते हैं। एक वयस्क पौधे के लिए लगभग 200-250 ग्राम नाइट्रोजन, 100-150 ग्राम फास्फोरस और 150-200 ग्राम पोटाश देना उपयुक्त माना जाता है।