नई दिल्ली। अगर आप आम की बागवानी करते है तो मार्च- अप्रैल का महीना आपके लिए बेहद खास है। क्योंकि इन दिनों आम के पेड़ों में बौर से फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। लेकिन इस समय बागवानों को लिए सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है कि फल आने के बाद उसके पौधे से गिरने की समस्या या फिर फल का आकार छोटा रह जाने की परेशानी होती है। आजकल आपको बताने वाले है की कैसे आप इस समस्या से नीजात पा सकते है।
क्या है बागवानी विशेषज्ञों की राय
उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के कृषि रक्षा प्रभारी ऋषि कुमार चौरसिया के अनुसार आम की बागवानी के लिए गर्मी का मौसम सबसे उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि इसी मौसम में पेड़ों पर बौर आने के बाद फलन की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान यदि बागवान जरा सी भी लापरवाही करते हैं, तो उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कब करें छिड़काव
बागवानी के विशेषज्ञों के अनुसार आम के पेड़ों में जब बौर के बाद फल बनने की प्रक्रिया शुरू हो रही हो, उस दौरान इमिडाक्लोप्रिड (6 मिली/15 लीटर पानी में घोल बनाकर) और प्लानोफिक्स (1 मिली/4 से 5 लीटर पानी में घोल बनाकर) दवा का छिड़काव करें।