जयपुर।राजस्थान के एक किसान ने बागवानी के बदौलत एक अद्भूत मॉडल पेश किया है। उन्होंने कैलाश चौधरी ने कच्चे आंवले को प्रोसेस करने चार हेक्टेयर की भूमि में करोड़ों का कारोबार कर रहे है। वे आंवले से बनी कैंडी, मुरब्बा और अचार शामिल हैं।
प्रतापगढ़ से मिली आइडिया
कैलाश चौधरी बताते है कि आंवला हरा-का-हरा बाजार में नहीं बिका तो उन्हे निराशा नहीं हुई। लेकिन उन्होंने हार मानना नहीं सीखा था। एक बार वे प्रतापगढ़ गए, जहां कुछ महिलाएं साधारण चूल्हे पर आंवले से लड्डू, कैंडी, मुरब्बा और अचार बना रही थीं तभी उन्हें लगा की आंवले से बहुत कुछ बनाया जा सकता है।
अनेक प्रकार के फलों की बागवानी
बागवान कैलाश चौधरी ने समय के साथ बदलाव किया और 15×15 फुट की सघन बागवानी अपनाई। इससे पौधों की संख्या बढ़ी और उत्पादन भी। आज उनके पास 1100 आंवले के पेड़, करीब 200 बेलपत्र के पेड़ और पुराने जामुन के पेड़ हैं।
विदेशों तक जाता है उत्पाद
बागवान कैलाश चौधरी आंवले से अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार करते है। जिनमें अलग-अलग फ्लेवर की कैंडी, तीन तरह के मुरब्बे, जूस और आचार के अलावा अन्य हेल्थ प्रोडक्ट तैयार करते है। उनका उत्पाद इंग्लैंड, अमेरिका, यूरोप, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया तक निर्यात होता है।