
नई दिल्ली।इस साल लागातार हो रहे मौसम में बदलाव के कारण लीची के फसल को नुकसान पहुंचना शुरू हो गया है। देश के कई बागान में मंजर तो आए है, लेकिन उसकी संख्या अन्य सालों के अपेक्षा थोड़ा कम है। इससे लीची की बागवानी करने वाले बागवानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि यही मंजर आगे चलकर फल में तैयार हो जाते है।
क्या कहते है विशेषज्ञ
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार बताया जा रहा है की मौसम में बदलाव के कारण लीची के पेड़ों की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है. सर्दियों की शुरुआत में तापमान ज्यादा रहने की वजह से कई जगह पेड़ों में नए पत्ते निकल आए, जिससे मंजर बनने की प्रक्रिया कमजोर पड़ गई।
सिंचाई करते समय रखें विशेष ध्यान
पिछले कुछ दिनों से कई इलाकों में बारिश नहीं हुई है, जिससे मिट्टी सूखने लगी है। ऐसे में जिन बागानों में नमी कम है, वहां किसान हल्की सिंचाई कर सकते हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय ज्यादा पानी देना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे मंजर को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है।
बग नामक कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है
लीची की बागवानी में बग नामक कीट का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है। इसके नियंत्रण के लिए किसानों को अलान्टो कीटनाशक को पानी में मिलाकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। साथ ही पेड़ों से गिरने वाले कीड़ों को इकट्ठा कर धूप में नष्ट करना जरूरी बताया गया है।