
शिमला।हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के निरमंड के निचले और मध्यम ऊंचाई वाले सेब बहुल क्षेत्रों में इस साल सेब बगीचों में पत्ते अधिक और फूल कम निकले हैं। इससे बागवान चिंतित हो गए हैं। मार्च बीतने वाला है, लेकिन निरमंड, अर्सु, बागीपुल और निरमंड में ऐसे सैकड़ों बगीचे हैं, जहां गुलाबी स्टेज भी शुरू नहीं हो पाई है। करोड़ों के सेब कारोबार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
चिलिंग ऑवर्स पुरा नहीं होने से हुई यह समस्या
बागवानी विशेषज्ञ इसका कारण चिलिंग ऑवर्स पूरे न होना बता रहे हैं। इसके अलावा बीते साल ज्यादा बारिश, पूर्व में अधिक फसल का होना और सेब पौधों में पुराने स्परों का अधिक होना कारण बता रहे हैं। इस साल ठंड का प्रकोप मार्च तक रहने से गुठलीदार फलों की भी कम सेटिंग हुई है। अधिकतर सेब बगीचों में फ्लॉवरिंग पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
इस साल फ्लॉवरिंग पर प्रतिकूल असर
बागवानी में पर्याप्त मात्रा में नमी है। निरमंड, नित्थर, बागीपुल शार्वी, चायल, बशला और जुआगी समेत अधिकांश स्थानों पर कई सेब बगीचों में यह समस्या है। बागवानों के बगीचों में फूल कम और पत्ते अधिक निकले हैं। बगीचों में इस साल फ्लॉवरिंग पर प्रतिकूल असर पड़ा है। मौसम के बदलाव के कारण बागवानी संकट में है।