नई दिल्ली।भारत में वायु प्रदूषण अब केवल सर्दियों की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह साल भर रहने वाला एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रदूषण का उच्च स्तर साल के अधिकांश समय बना रहता है।
मार्च से जून तक प्रदूषण का स्तर बढ़ा
हाल के वर्षों के सीपीसीबी आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि दिल्ली में मार्च से जून तक भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ रहता है। इन गर्म महीनों के दौरान धूल और ओजोन मुख्य प्रदूषक बनकर उभरते हैं। वर्तमान में, शहर में 'ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पहला चरण लागू है। पिछले सात दिनों में से चार दिन हवा की गुणवत्ता "खराब" श्रेणी में रही है।
कई शहरों में अभी भी प्रदूषण
विशेषज्ञों के अनुसार, यह नया पैटर्न स्थानीय उत्सर्जन, वायुमंडलीय रसायनों में बदलाव, मौसम की बदलती परिस्थितियों और बढ़ते शहरीकरण का मिला-जुला परिणाम है। ये कारक जहरीली हवा को कई भारतीय शहरों के जीवन का एक स्थायी हिस्सा बना रहे हैं। गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम सहित 17 शहरों में हवा की गुणवत्ता 'खराब' श्रेणी में बनी हुई है।