शिमला के नेरवा में सेब को छोड़ जापानी फल की खेती कर रहे बागवान

    09-Mar-2026
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शिमला।हिमाचल प्रदेश के नेरवा में रोहड़ू के नेरवा तहसील के कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कई बागवान अब सेब की जगह जापानी फल की बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसका एक कारण बीते कुछ साल से हो रहा जलवायु परिवर्तन है। इससे सेब की फसल में कमी आई है। बागवानों के एक वर्ग का दूसरे फलों के उत्पादन में रुझान बढ़ा है। अधिकतर बागवान अब सेब के पौधे लगाने के बजाय जापानी फल के पौधे लगा रहे हैं। जापानी फल को पर्सिमोन कहते हैं।

जापानी फल की 400 से अधिक प्रजातियां

 भारत के कुछ भागों में इसे तेंदू, अमरफल और रामफल भी कहा जाता है। इसका आकार संतरे जितना होता है। जापानी फल की 400 से अधिक प्रजातियां हैं, जिनमें से हचिया और फूयु सबसे मशहूर है। यह अलग-अलग प्रजातियों के अनुसार गहरे नारंगी, लाल और मिक्स नारंगी रंग में आती है। इसका पेड़ सेब के पेड़ की तरह होता है। पहाड़ी इलाकों में यह दो हजार फीट से सात हजार फीट की ऊंचाई पर उगाया जाता है।

जपानी फल की पौधे लगाए जा रहे है

प्रगतिशील बागवान सलमान ने बताया कि सेब के पौधों के रख-रखाव का खर्चा अधिक बढ़ जाने और फसलों के बार-बार टूटने के कारण लोग अब सेब के साथ जापानी फल के पौधे लगा रहे हैं। इस साल दिल्ली की मंडी में गुणवत्ता के आधार पर इस फल की 10 किलो की पेटी 900 से 2500 रुपये तक बिकी। इसके रख-रखाव का खर्चा भी सेब के मुकाबले कम है।