Ashwagandha Medicinal farming : खेती में नया ट्रेंड ! मेडिसिनल फार्मिंग से बदल रही किसानों की किस्मत

    18-May-2026
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Ashwagandha Medicinal farming : आज के दौर में खेती का मतलब सिर्फ गेहूं-चावल उगाना नहीं रह गया है। स्मार्ट किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर औषधीय फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अगर आप कम लागत में बंपर कमाई करना चाहते हैं तो अश्वगंधा की खेती आपके लिए एक अच्छा विकल्प साबित हो सकती है। इस फसल से महज 4 से 5 महीने में किसान करीब 1.5 से 2 लाख रुपये तक का प्रॉफिट कमा सकते हैं।

सबसे बड़ी खासियत यह है कि अश्वगंधा की जड़ें, बीज और तने, तीनों ही बाजार में अच्छे दाम पर बिकते हैं। अगर आपके पास बंजर या कम उपजाऊ जमीन है तो भी परेशान मत होइए। क्योंकि यह फसल खराब मिट्टी में भी सोना उगलने की ताकत रखती है। आइये जानते हैं इसका पूरा बिजनेस प्लान।

अश्वगंधा की खेती का सही तरीका
अश्वगंधा की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें बहुत ज्यादा सिंचाई या देखरेख की जरूरत नहीं पड़ती। यह देर से खरीफ के मौसम में बोई जाने वाली फसल है। जिसे ऐसे खेत में लगाना चाहिए जहां जलभराव की दिक्कत न हो।

बुवाई के लिए आप सीधे खेत में 5 किलो बीज का छिड़काव कर सकते हैं या फिर नर्सरी तैयार करके भी पौधे लगा सकते हैं। नर्सरी वाले तरीके में केवल डेढ़ से दो किलो बीज ही काफी होते हैं। वैज्ञानिक सलाह देते हैं कि खेत में नमी तो हो लेकिन पानी जमा न हो। क्योंकि ज्यादा पानी जड़ों को सड़ा सकता है। एक एकड़ की खेती से लगभग 3 क्विंटल तक सूखी जड़ें प्राप्त की जा सकती हैं, जो मार्केट में हाथों-हाथ बिकती हैं।

अश्वगंधा की बुवाई के लिए जल निकासी वाली दोमट या बलुई मिट्टी सबसे बेस्ट मानी जाती है। नर्सरी तकनीक अपनाने से बीजों की बचत होती है और पौधों की ग्रोथ भी बेहतर तरीके से मैनेज की जा सकती है। इसमें कीटों का हमला बहुत कम होता है, जिससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च लगभग जीरो हो जाता है।

जानें कैसे और कितनी होगी कमाई?
अश्वगंधा की खेती में निवेश बहुत कम करना पड़ता है। जबकि रिटर्न काफी अच्छा मिलता है. एक एकड़ में खेती की कुल लागत बीज, जुताई और खाद मिलाकर काफी लिमिटेड रहती है लेकिन जब फसल 4-5 महीने में तैयार होती है तो मुनाफे के आंकड़े चौंकाने वाले होते हैं। बाजार में अश्वगंधा की अच्छी क्वालिटी की जड़ों का रेट 300 रुपये से 400 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है।

जिससे केवल जड़ों से ही 1 रुपये लाख से ऊपर की कमाई हो जाती है। जड़ों के अलावा इसके बीजों और सूखे तनों को बेचकर भी किसान भाई एक्स्ट्रा मुनाफा कमा लेते हैं। जिससे कुल मुनाफा 2 लाख रुपये तक पहुंच सकता है:

एक एकड़ खेत से लगभग 3 क्विंटल तक सूखी जड़ें और साथ ही भारी मात्रा में बीज प्राप्त होते हैं। जड़ों को उनकी मोटाई के आधार पर ए, बी और सी ग्रेड में बांटकर बेचने से बाजार में ऊंचे दाम मिलते हैं। हाई डिमांड वाली मेडिसिनल फसल और च्यवनप्राश जैसी चीजों में इस्तेमाल के चलते इसकी बिक्री की टेंशन कभी नहीं रहती। आयुर्वेद और हर्बल प्रोडक्ट्स की बढ़ती लोकप्रियता के कारण बड़े-बड़े ब्रांड्स सीधे किसानों से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए भी तैयार रहते हैं।