
Litchi Fruit Cracking : लीची अपनी मिठास और रसीले स्वाद के कारण किसानों के लिए बेहद फायदे का सौदा मानी जाती है। लेकिन इस शानदार कमाई देने वाली फसल के साथ एक बड़ी चुनौती भी सामने आती है, जैसे ‘फलों का अचानक फट जाना’, जिसे 'फ्रूट क्रैकिंग' कहा जाता है। तापमान में बदलाव, तेज गर्म हवाएं और नमी की कमी मिलकर पूरी फसल को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सही वैज्ञानिक प्रबंधन और समय पर देखभाल ही किसानों को नुकसान से बचा सकती है।
लीची की खेती किसानों के लिए कम समय में अच्छी आय देने वाली फसल मानी जाती है, क्योंकि इसकी बाजार में मांग और कीमत दोनों ही स्थिर रहती हैं। लीची में ‘फ्रूट क्रैकिंग’ यानी फलों का फटना एक प्रमुख समस्या है, जो तापमान में उतार-चढ़ाव, गर्म हवाओं और नमी की कमी के कारण होती है और फसल की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाती है।
बागों में सही नमी बनाए रखना बेहद आवश्यक है। मिट्टी की फील्ड कैपेसिटी के अनुसार नियमित सिंचाई करनी चाहिए और जलभराव से बचना चाहिए ताकि फल सुरक्षित रहें।
0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में बोरेक्स मिलाकर हर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से फलों के फटने की समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है।
मई-जून की तेज धूप और गर्म हवाओं से बचाव के लिए बागों में विंड ब्रेक्स (हवा रोधक पेड़) लगाना चाहिए और सुबह-शाम हल्की सिंचाई करना फायदेमंद होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक तरीके अपनाएं और समय पर देखभाल करें, तो लीची की फसल को सुरक्षित रखते हुए उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे बाजार में अच्छे दाम मिलने के साथ किसानों की आय भी मजबूत होगी।