
Sugarcane Cropping : हरियाणा के हिसार में स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के कुलपति (वीसी) डॉ. बीआर कंबोज ने गन्ना किसानों के लिए इंटरक्रॉपिंग तकनीक को बेहद फायदेमंद बताया है। उन्होंने बताया कि गन्ने की खेती में इंटरक्रॉपिंग तकनीक से किसानों की आय बढ़ सकती है और खेती ज्यादा लाभदायक बन सकती है।
डॉ. बीआर कंबोज के अनुसार, गन्ने के साथ तिल, मूंगफली, मूंग, सोयाबीन, भिंडी और अन्य फसलों की सफल इंटरक्रॉपिंग करके किसानों को अतिरिक्त आय का मौका मिलेगा। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि कि किसान हमेशा 4 फीट की दूरी पर गन्ना की बुवाई करें, ताकि दूसरी फसलों की खेती आसानी से की जा सके।
डॉ. बीआर कंबोज ने कहा कि गन्ना के साथ दूसरी फसलों की खेती यानी इंटरक्रॉपिंग को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए. इससे किसानों को अतिरिक्त आय मिलेगी और जमीन व संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा। उन्होंने हाल ही में विकसित गन्ने की नई किस्म CoH-191 पर भी चर्चा की और कहा कि यह किस्म इंटरक्रॉपिंग के लिए काफी उपयुक्त और फायदेमंद है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ. बीआर कंबोज ने कहा कि खरीफ सीजन में गन्ने के साथ तिल और मूंगफली जैसी तिलहन फसलों की खेती करने से देश में खाने के तेल की कमी को कम करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दाल वाली फसलों को भी खेती में शामिल करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी और रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होगी।
डॉ. बीआर कंबोज ने प्रदर्शन प्लॉट का निरीक्षण भी किया, जहां गन्ने की खेती 4 फीट की दूरी पर की गई थी। जबकि आमतौर पर किसान करीब 2.5 फीट की दूरी पर गन्ना बोते हैं। विश्वविद्यालय का मानना है कि ज्यादा दूरी पर गन्ना लगाने से इंटरक्रॉपिंग आसान होगी और किसानों को अतिरिक्त आय मिल सकेगी।
वहीं कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि इस तकनीक में कम बीज की जरूरत पड़ती है और फर्टिलाइजर का इस्तेमाल भी आसान हो जाता है। इंटरक्रॉपिंग से खेत मजदूरों को अधिक दिनों तक रोजगार मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।