Jimikand Ki Kheti : लागत आधी और मुनाफा डबल! धान-गेहूं छोड़ इस 'अंडरग्राउंड' फसल की खेती कर रहे हैं स्मार्ट किसान

    29-May-2026
Total Views |

Jimikand Ki Kheti
: गेहूं-धान जैसी पारंपरिक फसलों को छोड़कर अब किसान स्मार्ट फार्मिंग कर रहे हैं। क्योंकि पारम्परिक फसलों के मुकाबले आजकल सब्जियों की खेती किसानों के लिए प्रॉफिटेबल साबित हो रही है। अगर आप भी बहुत ही कम लागत में सीधा डबल मुनाफा कमाना चाहते हैं तो जिमीकंद यानी सूरन की खेती आपके लिए एक बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकती है।

इस नगदी फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मंदी का नामोनिशान नहीं है और इसकी डिमांड साल के 12 महीने मंडियों में बनी रहती है। बहुत ही कम पानी, नाममात्र की देखभाल और कम बजट के साथ आप अपनी सूझबूझ से इस नगदी फसल के जरिए बंपर रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

लागत बेहद कम
जिमीकंद एक ऐसी कंद वाली फसल है जिसे बहुत ज्यादा देखरेख या महंगे कीटनाशकों की जरूरत नहीं होती है चूंकि इसके पौधे जमीन के अंदर तैयार होते हैं इसलिए इस पर मौसम की मार या आवारा पशुओं के नुकसान का खतरा भी बहुत कम रहता है। इसकी बुवाई के लिए बस अच्छे किस्म के कंद के टुकड़ों को सही दूरी पर मिट्टी में लगाया जाता है।

इस फसल में खाद और सिंचाई का खर्च बहुत ही सीमित आता है। जिससे एक बीघे या एकड़ में लागत अन्य सब्जियों के मुकाबले आधी रह जाती है। गोबर की खाद और जैविक तरीकों का इस्तेमाल करके इसकी क्वालिटी को और भी शानदार बनाया जा सकता है जिससे लागत और भी कम हो जाती है।

मार्केट में बंपर डिमांड से मुनाफा सीधा डबल

जिमीकंद की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसे उखाड़ने के बाद आप कई महीनों तक बिना कोल्ड स्टोरेज के भी घर में आराम से स्टोर करके रख सकते हैं, जिससे यह जल्दी सड़ती नहीं है। बाजार में इसकी मांग शादियों के सीजन के साथ-साथ आम दिनों में भी बहुत ज्यादा होती है क्योंकि यह सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।

जब मार्केट में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे होते हैं तब किसान इसे अच्छे भाव पर बेचकर अपनी जेब भर सकते हैं। लागत के मुकाबले इसकी बाजार कीमत इतनी बेहतरीन मिलती है कि किसानों का मुनाफा आसानी से डबल से भी ज्यादा हो जाता है।

अगर आप भी इस सीजन में बंपर प्रॉफिट कमाना चाहते हैं, तो पारंपरिक ढर्रे से बाहर निकलिए और जिमीकंद की इस जादुई खेती की शुरुआत करिए।