Climate Change WMO Report : अगले 5 साल और बढ़ाएंगे चिंता! दुनिया रिकॉर्ड गर्मी की ओर, WMO की डराने वाली रिपोर्ट

    29-May-2026
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Climate Change WMO Report
: दुनिया भर में बढ़ती गर्मी को लेकर एक बार फिर गंभीर चेतावनी जारी की गयी है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और ब्रिटेन के मौसम विभाग (Met Office) की नई रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले पांच वर्षों में पृथ्वी का तापमान रिकॉर्ड स्तर के आसपास बना रह सकता है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच पृथ्वी का तापमान लगातार ऊंचा रहने की संभावना है, जिससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता तापमान केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि खेती, जल संसाधन, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी इसका असर पड़ेगा। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आने वाले वर्षों में अल नीनो की स्थिति दोबारा मजबूत हो सकती है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में सूखा, बाढ़ और असामान्य मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 से 2030 के दौरान वैश्विक औसत तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर यानी 1850-1900 की तुलना में 1.3 से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रह सकता है। यह संकेत देता है कि दुनिया लगातार गर्म होती जा रही है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष ऐसा हो सकता है, जो अब तक के सबसे गर्म वर्ष 2024 से भी अधिक गर्म साबित हो। इसके होने की संभावना 86 प्रतिशत बताई गई है। यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार धीमी नहीं हुई है।

टूट जाएगी पेरिस समझौते की लक्ष्मण रेखा: 1.5°C की सीमा होगी पार
पेरिस जलवायु समझौते में वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने का लक्ष्य तय किया गया था। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि 2026 से 2030 के बीच कम से कम एक वर्ष में यह सीमा अस्थायी रूप से पार होने की 91 प्रतिशत संभावना है।

गौरतलब है कि 2024 में भी वैश्विक औसत तापमान लगभग 1.55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। हालांकि विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि किसी एक वर्ष में यह सीमा पार होना पेरिस समझौते की विफलता नहीं माना जाएगा, क्योंकि समझौते का मूल्यांकन लंबे समय यानी लगभग 20 वर्षों के औसत तापमान के आधार पर किया जाता है। फिर भी वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे का संकेत हैं और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ सकती है।

अल नीनो की वापसी 
रिपोर्ट में अल नीनो को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। अनुमान है कि 2026 के अंत तक अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है और इसका असर 2027 तथा 2028 में ज्यादा देखने को मिल सकता है।

अल नीनो एक ऐसी मौसमीय घटना है, जो प्रशांत महासागर के तापमान में बदलाव के कारण पैदा होती है. इसका प्रभाव पूरी दुनिया के मौसम पर पड़ता है. भारत समेत कई देशों में अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखे और कुछ में अत्यधिक बारिश की स्थिति बन सकती है।

रिपोर्ट के प्रमुख लेखक लियोन हरमैनसन का कहना है कि यदि 2026 के अंत में अल नीनो सक्रिय होता है, तो 2027 दुनिया का अगला रिकॉर्ड गर्म वर्ष बन सकता है.

आर्कटिक क्षेत्र सबसे तेजी से गर्म हो रहा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्कटिक क्षेत्र दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। इसका असर बर्फ पिघलने, समुद्र स्तर बढ़ने और वैश्विक मौसम चक्र में बदलाव के रूप में सामने आ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्कटिक में तापमान बढ़ने से पूरी पृथ्वी की जलवायु प्रणाली प्रभावित होती है और चरम मौसम की घटनाओं की संख्या बढ़ सकती है।

कृषि और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है असर
बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का असर खेती पर भी पड़ सकता है। कई देशों में फसलों की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है। सूखा, बाढ़ और असामान्य वर्षा जैसी घटनाएं किसानों की चुनौतियां बढ़ा सकती हैं।

भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि मानसून और तापमान का सीधा संबंध खेती और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।

भविष्य के लिए गंभीर चेतावनी
WMO की यह रिपोर्ट दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश देती है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती बन चुका है. यदि ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में गर्मी, सूखा, बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करने के लिए सरकारों, उद्योगों और आम लोगों को मिलकर तेजी से प्रभावी कदम उठाने होंगे। पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण पर गंभीर प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और संतुलित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं।